तन्हा तन्हा हम रहते हैं ,तन्हाई का ----आलम है
आ जाओ तुम मीत मेरे बुला रहा ये -----मौसम है
माना थे आहत तुम मुझसे, कुछ तो गलती मेरी थी
है अतीत में क्या रखा जब बदल चुका- ये मौसम है
घायल जब भी दिल होता,जीना मुश्किल सा लगता
स्वीकार करो ये आमंत्रण यही तुम्हारा---- मरहम है
दुनिया छोटी जीवन छोटा,कुछ पल ही तो साथ रहोगे
चाहो जितनी बार भी सोचो,मधुर मिलन ही संगम है
मेरा अपना कुछ भी नहीं सब कुछ तेरा है--" राजेश "
एक बार तू हां कह दे बस यही प्यार का ---परचम है
राजेश सिन्हा
आ जाओ तुम मीत मेरे बुला रहा ये -----मौसम है
माना थे आहत तुम मुझसे, कुछ तो गलती मेरी थी
है अतीत में क्या रखा जब बदल चुका- ये मौसम है
घायल जब भी दिल होता,जीना मुश्किल सा लगता
स्वीकार करो ये आमंत्रण यही तुम्हारा---- मरहम है
दुनिया छोटी जीवन छोटा,कुछ पल ही तो साथ रहोगे
चाहो जितनी बार भी सोचो,मधुर मिलन ही संगम है
मेरा अपना कुछ भी नहीं सब कुछ तेरा है--" राजेश "
एक बार तू हां कह दे बस यही प्यार का ---परचम है
राजेश सिन्हा
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