Tuesday, March 5, 2013

तन्हाई

तन्हा तन्हा हम रहते हैं ,तन्हाई का ----आलम है 
आ जाओ तुम मीत मेरे बुला रहा ये -----मौसम है 
माना थे आहत तुम मुझसे, कुछ तो गलती मेरी थी 
है अतीत में क्या रखा जब बदल चुका- ये मौसम है 
घायल जब भी दिल होता,जीना मुश्किल सा लगता 
स्वीकार करो ये आमंत्रण यही तुम्हारा---- मरहम है 
दुनिया छोटी जीवन छोटा,कुछ पल ही तो साथ रहोगे 
चाहो जितनी बार भी सोचो,मधुर मिलन ही संगम है 
मेरा अपना कुछ भी नहीं सब कुछ तेरा है--" राजेश "
एक बार तू हां कह दे बस यही प्यार का ---परचम है 
राजेश सिन्हा 

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