Tuesday, March 5, 2013

मेरी नज्म -4

अक्सर तन्हाई में 
आनेवाली तुम्हारी याद 
चुपके से मेरे 
लरजते लबों पर 
अपनी अयादत 
का निशान 
छोड़ जाती है 
और फिर आँखों से 
टपका आंसू 
नफस नफस 
गालों पे छलकता
रहता है ,,,,,,,,
(अयादत -शोक प्रदर्शन
नफस नफस -सांस--सांस )

राजेश सिन्हा 

No comments:

Post a Comment