इश्क को समझता हूँ इश्क को ही-- लिखता हूँ
वफ़ा मेरी फितरत है बस नाम तेरा लिखता हूँ
जो कुछ मिला है तुमसे उसे खुदादाद कहता हूँ
तुम्हारी हर अदा पे एक नया शेर ---लिखता हूँ
बेखबर नहीं हूँ हर पल की ---- खबर रखता हूँ
निकला हूँ सफ़र पे रहगुजर पे नजर- रखता हूँ
रौशन रहे ये उल्फत इसीलिए ---तो -जलता हूँ
तमाशा न बन जाऊं ,संभल के कदम रखता हूँ
हर लम्हा पूछता है सबब, सवाल सुन लेता हूँ
मन ही मन कुछ रंगीन से--सपने बुन लेता हूँ
बिखरी कलियों में से कुछ फूल चुन---लेता हूँ
मालूम है उदासी का सबब,सवाल सुन लेता हूँ
राजेश सिन्हा
वफ़ा मेरी फितरत है बस नाम तेरा लिखता हूँ
जो कुछ मिला है तुमसे उसे खुदादाद कहता हूँ
तुम्हारी हर अदा पे एक नया शेर ---लिखता हूँ
बेखबर नहीं हूँ हर पल की ---- खबर रखता हूँ
निकला हूँ सफ़र पे रहगुजर पे नजर- रखता हूँ
रौशन रहे ये उल्फत इसीलिए ---तो -जलता हूँ
तमाशा न बन जाऊं ,संभल के कदम रखता हूँ
हर लम्हा पूछता है सबब, सवाल सुन लेता हूँ
मन ही मन कुछ रंगीन से--सपने बुन लेता हूँ
बिखरी कलियों में से कुछ फूल चुन---लेता हूँ
मालूम है उदासी का सबब,सवाल सुन लेता हूँ
राजेश सिन्हा
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