Tuesday, March 5, 2013

मेरी नज्म-7

कुछ उलझे 
हुए ख्यालात 
बहके बहके से 
अश-आर 
बुजदिल 
तमन्नाओं की 
लम्बी फेहरिश्त 
गमशुदा सी दिखती 
कायनात 
मुक़द्दस एहसासों 
की अकीदत
लब्जों की
थरथराहट
और ऐसे में
दूर से सुनाई
देती उनकी आहट
गोया जिन्दगी के
सन्नाटे में
किसी ने
फिर से
उल्फत की
ग़ज़ल छेड़
दी हो -,,,,,,,,,,,
राजेश सिन्हा 

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