यक़ीनन पुरसुकून
लम्हात की
तलाश है
मुझे/ताकि
सजदा कर
सकूं/अपनी
उस मोहब्बत को
जिसने दिखाए
थे/मुझे
कई खूबसूरत
ख्वाब/जो
रह गए आधे/अधूरे
और कर गए
रूह को बेजान
फिर भी मेरे
तसब्बुरात में
हरेक बार सिर्फ
एक ही तस्वीर
बनती है,,,
मेरे मुकद्दस
मोहब्बत की,,,,,,
राजेश सिन्हा
03/03/13
लम्हात की
तलाश है
मुझे/ताकि
सजदा कर
सकूं/अपनी
उस मोहब्बत को
जिसने दिखाए
थे/मुझे
कई खूबसूरत
ख्वाब/जो
रह गए आधे/अधूरे
और कर गए
रूह को बेजान
फिर भी मेरे
तसब्बुरात में
हरेक बार सिर्फ
एक ही तस्वीर
बनती है,,,
मेरे मुकद्दस
मोहब्बत की,,,,,,
राजेश सिन्हा
03/03/13
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